एहसास ये आज होने लगा
धीरे धीरे अब मौसम बदलने लगा
सूरज अब जल्दी ओझल हो जाए
शाम की खुशबू अब जल्द आ जाए
हवाओं में अब ठंडक
महसूस होने लगी है
अब रात को गहराई
और ज्यादा होने लगी है
अब मेरी मेरे साथ की महफिल
खूब जमने लगेगी
खुद से बात करने की वजह
अब और ज्यादा मिलने लगेगी
अपना ही हाथ पकड़े
अपने आप को ही
खुद ही दिलासे देते
जिंदगी ये लम्हे
जी जायेगी
ये साथ हर बार की तरह
उन्ही रंगो में रंग जायेगी
ख्वाबों के करवाओ में
जवानी यूंही बीत गई
ना जाने क्या सोचा था तब
ये साथ खुद ही
खुद की साथी हो गई
अब सोचूं क्या हुआ क्या नही
जिंदगी जिए के नही
इसका हिसाब ही
कही मिला नही
अब लगता है के
मौसम बदला
समय बदला
ना बदला जीवन का चक्र
हवाओं में ही नहीं
ठंडक आ गई
जिंदगी ही अब
कुछ ठंडी पड़ गई
फिर ये एहसास अब होने लगा
मेरे ही साथ मैं ज्यादा रहने लगा
अब रात को गहराई
और ज्यादा होने लगी है
अब मेरी मेरे साथ की महफिल
खूब जमने लगेगी
खुद से बात करने की वजह
अब और ज्यादा मिलने लगेगी
प्यार का सागर हूं मैं…
प्यार सभी करते है
कोई थोड़ा कोई बहुत करते है
किसीको बस प्यार लेना आता
कुछ को बस देना आता है
किसी की दया को कोई प्यार समझता है
किसी के दोस्ती से प्यार हो जाता है
प्यार की सीमाएं न होती कोई
प्यार बस प्यार होता है
कोई आंखों से करता है
कोई बाहों से
प्यार जब सच्चा हो
हर रूप में उसका एहसास होता है
दूरी कभी बहुत होती है
प्यार मगर कम नहीं होता
पास रहकर भी कभी कभी
उसी से प्यार नहीं होता
प्यार का विश्व बड़ा है
अतुलनीय है
नापो तो चुटकी भर भी नही
ना नापो तो समंदर की गहराई भी ज्यादा नहीं
प्यार की अनुभूति के अविश्वसनीय एहसास है
जिसके पास हो उसके पास भी होता है
जिसके पास नही उसको भी तो होता रहता है
कमी किसी को प्यार की खलती रहती है
कभी कभी जिसको खूब मिलता है
उसको उसकी कीमत ही महसूस होती नही
प्यार होने की खुशी
खोने गम
हर किसी के नसीब में नहीं होता
कुछ मेरी तरह भी होते है
प्यास प्यार के हर बूंद की होते है
सागर में रहकर भी प्यास का बस एहसास होता है
की वो घूंट बस नज़र आ सकता है मुझ जैसे को
पीने को खारे पानी के अलावा
कुछ नही रहता
सोचा मैने कई बार है
किया प्यार मैने भी कई बार है
हाल ये मेरे साथ हर बार हुआ है
कभी किसीको बता ना सका
किसको को बताकर हसी का खिलौना बना रहा
लोगों की ठहाको में
मैने अपने प्यार को
एक भंवर में डूबता पाया
बस अब मैं
उन कुछ चंद लोगो सा हूं
जो बांट तो पूरा सागर हूं प्यार का
पर जीते जी इस तरह जिया हूं
एक बूंद न लगा पाया होटों से प्यार का।
कुछ इस तरह… Kuch is tarah…
मैं तेरी राह देखू
कुछ इस तरह
कोई भंवरा फूल खिलने की राह देखे
जिस तरह
तू आसमान में निकल आए
बस यही चाहत है मेरी
तुझे देखू हर अंधेरों में मैं
बस यही राहत है मेरी
तू दूर गगन का सितारा
मैं इस जमीन का पत्थर
बस तुझे देखू
तो भी चमके किस्मत मेरी
तू मेरे अंधेरे ख्वाबों की रोशनी
मेरे बंद आंखों की एक दबी कहानी
जिसे मैं देखना चाहु हर पल
खुलते ही आंख, जिसे खोने का डर हो पल पल
मेरी चाहत की कहानी भी है
कुछ इस तरह
जो मैने बया की हर बार
इस तरह
तू बहुत दूर है मुझ से
ये मेरे दिल ने न बात मानी
कहा तू गगन का सितारा
और कहा मैं पत्थरो का धनी
अपना सीना चीर भी
तेरी चमक न पाऊं मैं
अंधेरों में तेरी खुद पर रोशनी देख
खुश हो जाऊं मैं
इन लम्हात को
तेरे सहारे जी रहा हूं
तेरे दिल की धड़कनों को
अपने सीने में धड़का रहा हूं
बस अब जिंदगी गुज़र रही
कुछ इस तरह
बात जो मैने कही है हर बार
जिस तरह
की मैं तेरी राह देखू
कुछ इस तरह
कोई भंवरा फूल खिलने की राह देखे
जिस तरह।
-विहंग
Tere Dil Pe…
वही लिख दिया
जो खुदा ने मुझ से कहा
उसकी मर्ज़ी के आगे
मैं ना चला…
कलम भी उसकी
पन्ने भी उसी के
लिखना बस मुझे था
वो मैने कर दिया
तूने भी तो प्यारा ये
कम जुल्म न किया
बिन सोचे बिन कहे
मेरे दिल पे अपना नाम लिख दिया
ये खुदा की जिद थी
वरना हम कौन है
कलम बिन सियाही की होती
और पन्ने ही न होते
- विहंग
Bass yuhi phir ek baar
लिबाज़ कोई भी पहन लो
आंखो की खूबसूरती वही है
तुम्हे देख दिल जितना चाहे झूम ले
होटों से मिलता नशा बस वही है
जी करता है
इन जुल्फों के सायों में खो जाऊ
सदियों से नींद न आई
एक पल में सो जाऊ
कहने को और भी बहुत कुछ है बाकी
पर राज की बात वही है
की हमको तुमसे मोहब्बत है
अब जमाना इसे गलत ही समझ ले
मेरी लिए तो यही बात सही है
- विहंग
कुछ यूंही
हम ब्रश लिए खड़े रहे
की कोई तस्वीर बनाएंगे
वो खुद तस्वीर बन कर आ गए
हमारा कागज कोरा कर गए।
यूंही राह में गुजरते हुए
वो नजर आ गए
कुछ ऐसा हुआ
की हम लौट ही न पाए
तेरे दीदार को
सारा जहां तरसता रहा
खुश नसीब तो बस मैं ही था
ख्वाबों हर रोज तुम मेरे ही आते रहे।
आज अगर मौत आए भी तो ठहर जाए
की आज उनके दीदार का दिन है
बाद में तुम्हे गले लगाएंगे
पहले जी भर की आंख उन्हें देख ले।
यादें (Yaaden)
की यादें पीछा छोड़ती नही
आज यादें बनाता नही
यादों से आनेवाला कल बनता नही
बारिश की हर बूंद में है
गुजरे कल के मिट्टी की महक
सूरज के हर उजाले में है
गुजरे कल की छांव की चहक
हर रात के दियो में है
गुजरे कल के अंधेरों की परछाई
हर दिन के उजाले में है
गुजरे कल के फूलों की खुशबू
वो दोस्तों के साथ
एक रोटी खाना
एक कांच के ग्लास में
सब मिल बाट के चाय का पीना
याद हर बात आती है
जाती मगर वोह रात नही
जो आज को इस तरह ठहरा गई
आती कोई वैसी सुबह नही
– vihang
आंसू पीकर अक्सर (Aansu pikar aksar)
आंसू पीकर अक्सर
मैं रोया तन्हाईयो में
अंधेरी गलियों में घूमा
अंधेरे के सायों में
मैं सोचता रहा
यूंही हरबार
बार बार
जीना क्यों इतना
बोझल हो गया
सपने कई थे कभी
उन्हें तोड़ने वाले भी
निकले कई
रातें गुजारी मैने
आंखों में
पलकों को भी नींद नहीं आई
आज तो
आंखों का समंदर
भी, रेगिस्तान बन गया
बहार थी जहां
कांटो का मैदान बन गया
अब तो चलने से
भी कतराते है पैर
थक गए है
इतने ज़ख्म खाकर
हाथों में न रही
वो किस्मत की लकीरें
बदकिस्मती लिखी हर जगह है
खुदा से भी
क्या गिला करे अब
जानता तो सब है वोह
मानता बस नही
मेरा दिल जो
धड़कन बस एक धुन
बनकर रह गई है
जो सुनाई देती है हर पल
हर पल जो तन्हाई से घिरा है
आस पास कई शोर है
मगर सुनाई देती
कोई आवाज नहीं
आंसू पीकर अक्सर
मैं रोया तन्हाईयो में
अंधेरी गलियों में घूमा
अंधेरे के सायों में
- विहंग
Life, a string of beads
Life is,
But a string of beads
Or may be some Pearls too
Each event you take
Carefully and put them together
Some big some small
With the impact
Some small some big
The beads are what you achieved
Or may be you let go,
But held on, in heart
Some brought a smile
Some gave pain
Some turned out to be Pearls
Shiny and bright
Very few though
As they are rare and
Sometimes rarely in sight
As this string gets longer
The beads grow more
Some Pearls add too
Some times it feels heavy
Some times it feels not so
Then one fine day
Someone you see as your own
Show them this string of life
They blatantly, cut it
Then all you see is
The beads scattered every where
The pearls gone forever
All they leave is but the memory
Of how it was built,
Now all can one do
Is add a knot or two
To the string and
Try and pull the beads together
Pearls if in sight, too
With the hope
That they will bring back
The memories lost
But Alas, not all beads come together
Not all of the pearls too
All you could do
Is blame yourself
For that someone
Was the one you
Handed the scissors to
-Vihang
क्या सही क्या गलत
(kya sahi kya galat)
रास्ते अलग
मंजिलें अलग
राही अलग
ठिकाने अलग
जिंदगियां अलग
जीनेके मायने अलग
पर सोचकर देख लो,
सूरज वही
चांद वही
हवा वही
पानी वही
पेड़ वही
पौधे वही
फूल वही
पत्ते भी वही
तो
सांस भी वही
आस भी वही
भूख भी वही
प्यास भी वही
पर इंसान के
सोच अलग
तौर तरीके अलग
इंसानियत के मायने अलग
और जीनेके रास्ते भी अलग
फिर सोचो न सोचो
क्या सही क्या गलत
क्या सही क्या गलत…
– विहंग